Sunday, 3 July 2022
कुछ बातें....20
आज तुम्हें फर्क नही पड़ता कि मैं तुमसे दूर हो रही हूँ, कल वापस आना पड़ा तो क्या तुम मुझतक पहुँच पाओगे ...?तुम्हारे कदम आगे बढ़ रहे हैं और पीछे के रास्ते मिटते जा रहे हैं।आने वाले दिनों में कोई ऐसा न होगा जो मेरी कमी पूरी कर देगा।वो तुम्हें समझ में आएगा ,पर अभी नही।तुम दूर तक सफर कर लो, हो सकता है कोई बेहतर मिले।अंशुमान को अपने से दूर जाते हुए रागिनी भरे आँसुओं से देखती है।पर,रोक नही सकती।
मेरी ही कलम से......
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
अपनी ओर
पाँव के छाले कहते हैं,रुक जाओ अब आगे न बढ़ो आंखों में आंसू चुभते हैं,मंजिल को मुझे परे रखो अंतर्मन का संग्राम -सघन,बन राह का पर्वत रोकेंगे...
-
कुछ खरोंचे हैं मन -बदन पर तुम्हें जो दिखती हैं वो लकीरें खिंची हैं ... ढाल रही है जिंदगी अपने हिसाब से बेढब पत्थर सी वो पड़ी मिली थी... परिस्...
-
मीरा ने अपनी सारी सही करते हुए अतुल की ओर देखा। उसके देखते ही अतुल नजरें चुराते हुए ...फिर अचानक से उसपर झपटते हुए कहा,अब अपना रोना - धोना ...
-
जैसे जिंदगी एक तलाश थी तुम पर आकर रुक गई। कतरा-कतरा बह रहा तूँ रग-रग में जैसे .... शाम ए जिंदगी की बाती तुमसे मिलके जल उठी। ...
No comments:
Post a Comment