घड़ी के तीन काँटो का शोर
समझते ही ...
झकझोर गया कोई जैसे
सबसे अधिक शोर
क्षण क्षण का था
जो,नाली के कीड़े जैसी
मूल्य रहित मौत की ओर
इशारे कर रही थी
जी किया, समय यंत्र भंग हो जाये
पर, रुकता तो यंत्र
समय यंत्र से निकल आगे
बढ़ रहा था...
ये तीन काँटे,
समझ से परे
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